Then You Came …

And Then you came..
To hug me tight ..
I was able to feel your warm Breath over my shoulder
When I felt your body heat transmitting within me..
The numbness of my bones was long gone..
The tears of my eyes was rolling against cheeks..
Weren’t they dried too before ..
I was waiting for you from so long..
You were in the camp fighting for nation..
Not sure if I will ever see you again..
But here you are..
Caressing my back , kissing on my neck …
Telling me that you missed me..
and that You came back to hold me Forever..

समाज..

क्युं हैं रे समाज , क्युं है ये तेरी नीतियाँ ..
सिर्फ तेरे कारन ना जाने खो गयी कितानी हसींकी ठहाकियाँ..

धरम – जात पे ही सिर्फ तू सबको तोलता रेहता हैं..
ना जाने क्यूं तु जिंदगी दुसरो की यूँ पिरोता रेहता हैं..

अरे , तेरे इन लीला से भगवान भी ना बच पाये..
राधेश्याम बस नाम के ही रेह गये, कभी एक जान ना हो पाये..

रंग – रूप , शौरत के ढाचे तो पेहलेसेही हैं बनाये..
जो ना बैठे उनमे उनका जीना भी तू दश्वार कराये..

कैसा जाल बनाया हैं रे समाज तूने की निकाल ना पाये
आम इंसान इससे बाहर..
सब जानते हुये भी क्युँ करना पडता हैं आचरण तेरे
नियमों का , चाहे कितने भी लगे ठोकर..

-String_of_Thoughts
-Harshada Raut